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प्रीतिप्रहसितापाङ्गम् अलकै रूपशोभितम् ।
लसत्पङ्कजकिञ्जल्क दुकूलं मृष्टकुण्डलम् ।
स्फुरत्किरीटवलय हारनूपुरमेखलम् ।
शङ्खचक्रगदापद्म मालामण्युत्तमर्द्धिमत् ॥ ४८ ॥
लसत्पङ्कजकिञ्जल्क दुकूलं मृष्टकुण्डलम् ।
स्फुरत्किरीटवलय हारनूपुरमेखलम् ।
शङ्खचक्रगदापद्म मालामण्युत्तमर्द्धिमत् ॥ ४८ ॥